9:28 pm Wednesday , 26 February 2025
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महर्षि दयानंद का तो बोध हो गया, हमारा कब होगा ? आचार्य संजीव रूप

बिल्सी ,यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज के तत्वाधान में शिवरात्रि के अवसर पर महर्षि दयानंद का बोधोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ! इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने महर्षि दयानंद का गुणगान किया ! उन्होंने कहा महर्षि दयानंद सरस्वती जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की तथा समाज में फैली हुई बुराइयों को दूर भगाया , सत्यार्थ प्रकाश जैसा अनमोल ग्रंथ लिखा तथा देश की आजादी का मंत्र दिया उनका जन्म गुजरात के टंकारा ग्राम में 12 फरवरी 1824 हुआ था ! उनका नाम मूल शंकर रखा गया था ! जब वह 14 वर्ष के थे तब शिवरात्रि का पर्व आया , परिवार के लोगों ने शिव की पूजा की तथा शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाया ! मूल शंकर के मन में एक जिज्ञासा पैदा हुई कि शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ यह खीर आदि पदार्थ आखिर भगवान खाएँगे कैसे? उनके मुख तो है नहीं ! जब थोड़ी देर बाद चूहे निकल आए और उन्होंने वह खीर पुरी खाना शुरू कर दिया तब उन्होंने पिता को उठाया और पूछा कि यह कैसे भगवान है जिसका माल चूहे खा रहे हैं? तब पिताजी ने कहा यह सच्चे शिव नहीं है सच्चे शिव तो कैलाश पर रहते हैं तब मूल शंकर ने व्रत तोड़ लिया और फिर कभी पूजा ना की तथा सच्चे शिव की तलाश में निकल गए ! 23 वर्ष की साधना के बाद उन्होंने सच्चे शिव का साक्षात्कार किया और जाना कि ईश्वर निराकार व सर्वशक्तिमान है जो सर्व व्यापक है ! उसका दर्शन आत्मा में ही होता है ! महर्षि दयानंद ने गुरु से ज्ञान लेने के बाद समाज में फैले हुए पाखंड तथा अवैधिक मान्यताओं को दूर करने के लिए बीड़ा उठाया और पूरे देश में शास्त्रार्थ के माध्यम से सत्य का प्रकाश किया! उन्होंने आर्य समाज की स्थापना करके और 10 नियम बनाकर तथा सत्यार्थ प्रकाश संस्कार विधि गौ करुणा निधि तथा वेद भाष्य करके एक महा क्रांति ला दी ! पाखंड का का किला ढहने लगा लोग बड़ी संख्या मेंआर्य समाजी होते चले गए ! स्त्रियों को विद्यालय खोले गए , बच्चों को वेद विद्या पढ़ने के लिए गुरुकुल खोले गए समाज सेवा के अनेक कार्य शुरू हो गए और धीरे-धीरे महर्षि दयानंद का जादू सभी के सर पर चढ़कर बोलने लगा ! देश की आजादी में महर्षि दयानंद का बहुत बड़ा योगदान है लाला लाजपत राय, सुभाष चंद्र बोस , भगत सिंह j रानी लक्ष्मी बाई , तात्या टोपे, मंगल पांडे, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे परम देशभक्त उन्हीं के शिष्य थे । इससे पूर्व आर्य समाज के पुरोहित पंडित प्रश्रय आर्य ने यज्ञ कराया ! तथा आर्य संस्कार शाला के बच्चों ने सुंदर भजन गाए ! कार्यक्रम मे श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती कमलेश कुमारी सुखबीर सिंह, विचित्रपाल सिंह पंजाब सिंह, राकेश आर्य, कुमारी मोना रानी, कुमारी तानिया रानी आदि मौजूद रहे !