मेहँदी का प्रयोग समस्त विश्व में अलग-अलग रीति-रिवाजों तथा रस्मों में बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है, विशेषकर हिन्दू धर्म में।
👉मेहँदी को स्त्री के सोलह श्रृंगारों में से एक प्रमुख अंश माना गया है, जिसके बिना श्रंगार अधूरा- सा माना जाता है।
विवाह का अवसर हो और महिलाएं श्रंगार ना करें यह तो असभंव है
तुलसी जी एवं शालिग्राम के विवाह की पूर्व संध्या पर 24 नवंबर शुक्रवार को सांय 5 बजे मेंहदी का विशेष आयोजन श्री रघुनाथ जी मंदिर में किया गया है। सभी महिलाओं से विनती है कि समय से पहुंच अपने अपने हाथो में मेंहदी लगवायें एवं जिनको प्रभु ने मेंहदी लगाने कि कला सीखाई है वह दुसरो के हाथो में मेंहदी लगायें एवं स्वयं भी लगवायें।
मेंहदी रस्म
दिनांक – 24 नवंबर शुक्रवार
समय – सांय 5 बजे
स्थान – श्री रघुनाथ जी मंदिर, बदायूं।